ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया के विरोध में देवबंद के वकीलों ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री दफ्तरों में पेपरलेस ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया लागू करने के फैसले के खिलाफ देवबंद के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है।
देवबंद (सहारनपुर)।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री दफ्तरों में पेपरलेस ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया लागू करने के फैसले के खिलाफ देवबंद के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। इस योजना के विरोध में सिविल बार एसोसिएशन, देवबंद ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (SDM) देवबंद को सौंपकर इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही वकीलों ने आगामी 17 जून से 20 जून 2026 तक उपनिबंधक (रजिस्ट्री) कार्यालय में कार्य बहिष्कार और हड़ताल पर रहने का सर्वसम्मति से ऐलान किया है।
रोजगार छिनने का सता रहा है डर
सिविल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से जनविरोधी है। वर्तमान व्यवस्था के तहत बैनामा (रजिस्ट्री) आदि कराने की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में स्टाम्प वेंडर, टाइपिस्ट और अधिवक्ताओं को रोजगार मिलता है। पेपरलेस ई-रजिस्ट्री लागू होने से इन सभी लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा और आम जनता को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
बार एसोसिएशन की बैठक में लिया गया फैसला
इस संबंध में सिविल कोर्ट परिसर में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ठाकुर विरेन्द्रपाल सिंह एडवोकेट की अध्यक्षता में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसका संचालन महासचिव राकेश कुमार आर्य एडवोकेट ने किया। बैठक में सभी अधिवक्ताओं ने एक सुर में सरकार के इस कदम की निंदा की।
हड़ताल का निर्णय: सरकार के इस फैसले के विरोध में उपनिबंधक कार्यालय देवबंद में कार्यरत वकीलों ने दिनांक 17-06-2026 से 20-06-2026 तक पूरी तरह से कार्य बंद रखने और हड़ताल पर रहने का निर्णय लिया है।
ज्ञापन सौंपने वाले मुख्य अधिवक्ता
वरिष्ठ अधिवक्ता राम किशन सैनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ज्ञापन सौंपने और विरोध प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से:
बार अध्यक्ष ठा० विरेन्द्रपाल सिंह, महासचिव राकेश कुमार आर्य
राम प्रताप सिंह, राम किशन सैनी, सुरेंद्र पाल सिंह
रिजवान कासमी, खालिद खान, अजीम गोड़, शाहनवाज
अमित कुमार शर्मा, नरपत सिंह, हर्षित गुप्ता
वीरेंद्र सैनी, रामपाल चौधरी, कुलदीप सैनी, शंभू सैनी और विकास राणा समेत भारी संख्या में अधिवक्ता
8गण मौजूद रहे।


